Jan 28, 2011

माँ हर वो दिन कैसे अच्छा थ!!

28 दिसम्बर… इस दिन मेरी माँ का जन्मदिवस होता है… उसी दिन मैंने ये कविता अपनी माँ के लिए लिखी थी… जो आपके समक्ष अब आ रही है। इसकी हर पंक्ति पुर्ण रूप से सच को ही दर्शाती है॥ उम्मीद करती हूँ ये आप सभी की आशाओं पर खरी उतरेगी।
धन्यवाद
जैसे ही सूरज उगता था
माँ तेरा चेहरा दिखता था
आज मैं सोचा करता हूँ,
माँ हर वो दिन कैसे अच्छा था!!

जब तू थी डाँटती
कुछ रोशन सा हो जाता था
आज कोई डाँट नहीं, फिर क्यों अँधियारा सा लगता है
आज मैं सोचा करता हूँ
माँ हर वो दिन कैसे अच्छा था!!

आज भी तेरी याद से
दिन की शुरुआत कर लेता हूँ
साये में तेरे आशिर्वाद के
हर मुश्किल को सह लेता हूँ
झूठ बोलता, गड़बड़ करता
सारी मक्काड़ी मैं कर लेता था
आज मैं सोचा करता हूँ
माँ हर वो दिन कैसे अच्छा था!!

तुझे छोड़, सबकुछ है बदला
मैं तुझे पहले भी खुश करना चह्ता था
आज भी यही कामना करता हूँ
तेरी गोद में भी वही आराम है,
जो पहले होया करता था
आज मैं सोचा करता हूँ
माँ…… हर वो दिन कैसे अच्छा था!!