बाल्यवस्था से ही हमें लक्ष्य के प्रति सचेत करना शुरू कर दिया जाता है. अकसर हम बच्चों से पूछते हैं कि बड़े होकर तुम क्या बनना चाहते हो. इसमें कोई दूसरी राय नहीं की यह सही भी है. अर्थात समस्या लक्ष्य का बोध कराने में नहीं, अपितु सही लक्ष्य के चयन में है. अंत में काश शब्द अगर न लगे तो जीवन सच में अद्भुत अनुभव हो सकता है. प्रस्तुत कविता का लक्ष्य यही बताना है कि कोई भी मनुष्य कम नहीं बस हर किसी के कार्य क्षेत्र अलग हैं इसलिए अलग हैं उनकी क्षमताएं।
