जिधर भी देखा
नज़रें उठा कर
वहां तुम थे
धूप हो या छाँव
हर पड़ाव पर
उपस्थित तुम थे
जहाँ गलत हुआ
वहां सुधार तुम थे
मेरी हर विपदा में, हर संघर्ष में
समर्थ की चट्टान से खड़े तुम थे
हर सफलता में
वो मंद मुस्कान तुम थे
और बढ़ो आगे वाला
प्रोत्साहन तुम थे
धीमे धीमे जीवन में
संस्कार बोते तुम थे
मेरी हर प्रेरणा का
आधार तुम थे
हर मंजिल के
संवर्धक तुम थे
मेरे विचारों के
जो पोषक तुम थे
में हो सका हूँ खड़ा आज
कुछ इस तरह हर अंदाज में तुम थे
मेरे हर आरम्भ के
आशीर्वाद तुम थे
मेरे हर उत्कर्ष के
आदर्श तुम थे
मैं जहाँ चला
वहां खड़े साथ तुम थे
रुक गया कभी तो
प्रोत्साहन के वचन तुम्हीं थे
मेरा आज बना ही तब
जब हर कल का हिस्सा तुम थे
इस सौभाग्य को प्राप्त किया
शायद पिछले कर्म अच्छे ही इतने थे
आज भी मेरे जीवन का
प्रेरणाश्रोत हो तुम
आदर्श जीवन का
ईमानदार सम्बोधन हो तुम
सत्यता का स्वछन्द
उदाहरण हो तुम
मेरे ह्रदय के तारों को झंकृत करते
मेरे पिता! मेरे भावों का उच्तम एहसास हो तुम
मेरे भावों का उच्तम एहसास हो तुम