जीवन की राहों को जिस प्रेरणा की अकसर जरुरत होती है, उसी प्रेरणा को कुछ पंक्तियों के माध्यम से मैने व्यक्त करने की छोटी सी कोशिश की है, उम्मीद करती हूँ ये पंक्तियाँ आपकी आशा पर खरी उतरेंगी !!! धन्यवाद्।
दिन की काली रोशनी चलना करती हो मुश्किल
तो रातों में चाँद की छाँव मे चलना तुम
हो जाए कंकड़ को सह पाना मुश्किल
तो पगडंडी की राह पकड़ना तुम
है जीवन ये कठिन राह एक
कुछ अमृत भी संग ले लेना तुम
ना सोचो मन्जिल एक राहत ही है
कुछ सह्ने की हिम्मत, अन्त के लिए भी रखना तुम
हो राहो में अपनों की आँखों में भी बेगानापन
हार तब भी ना मानना, चाहें आँखें बंद कर लेना तुम
आखिर हिम्मत भी एक नया सवेरा है
उसकी किरणों को भी साथ ले लेना तुम
धीरे चलना, मद्दम चलना
मगर सही राह पकड़ना तुम…

2 comments:
काफी प्रभावशाली शब्दों में अभिव्यक्त किया है तुमने अपने विचारों को .प्रेरनादायक एवम सटीक शब्दों का प्रयोग कर के यह कविता हर व्यक्ति का मार्गदर्शन कर सकती है..निम्न पंक्तियाँ मुझे सबसे ज्यादा पसंद आईं..
" हो राहो में अपनो की आँखों मे भी बेगानापन
हार तब भी ना मानना, चाहें आँखें बंद कर लेना तुम "
अपनी सोच को इतने प्रभावशाली तरीके से कागज़ पर उतार पाना वास्तव में तुम्हारे अच्छी लेखन शैली का परिचायक है..!!
अंकिता दी: लेखन शैली पर तो कभी ध्यान नही दिया, बस मन के भावों को ही पन्नो पर हर बार उतार दिया… आपकी सराह्ना के लिए बहुत बहुत धन्यवाद!!!
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