Dec 18, 2010

"स्वर्ण स्वप्न"

इक नन्हे से बच्चे का कोमल सा मन बड़े ही सपने बुनता है…। मगर जब वो धीरे धीरे बड़ा होता है, और असली दुनिया में कदम रखता है तो किस तरह उसके सपने धीरे धीरे टूटते हैं उन्ही भावनाओं को व्यक्त करने का प्रयास करती है ये कवीता…                   ।


उलझा हुआ धागा कोई,
पांव आज अटक गया।
स्वर्ण स्वप्न से जगा कोई,
धरातल पटक गया॥

कदम तो बढा आशा का था, जाने कैसे हुआ
निराशा के भंवर में भटक गया।
कोशिश थी लक्ष्य को पा लेने की,
हार का झोंका अलग कहीं झिटक गया॥
स्वर्ण स्वप्न से जगा कोई…

रोशनी ही रोशनी तांकता था हर जगह,
देख वो दुनियावी खोखले दिखावे को,
अँधेरे कोने मे जा कहीं सिमट गया।
चल पड़ा था अपना मान कर जिन्हें,
परछाईयों का धुंध पा आत्म उसका सिसक गया॥
स्वर्ण स्वप्न से जगा कोई…

विश्वास से भरकर चला था जो,
आखिर अंधविश्वास से कैसे लिपट गया?
कोई देखकर ही सँवार लो ,
वक्त का झोंका आज उसे कहीं निपट गया॥
स्वर्ण स्वप्न से जगा कोई,
धरातल पटक गया



                   

4 comments:

Anonymous said...

किस प्रकार से समाज के कारण एक बच्चा अपने सपनों को पूरा करने में विफल हो जाता है ..बहुत खूबसूरती से उस भावना को व्यक्त किया है तुमने ... ..हर व्यक्ति कहीं न कहीं कभी न कभी ऐसे दौर से गुज़रता है ..उसके पास दो रास्ते होते हैं या तो वो हिम्मत करके अपने सपनों को साकार करे या फिर हार मानकर एक आम आदमी की तरह जीवन व्यतीत करे और ज़्यादातर लोग अपने सपनों का गला घोंटकर दूसरा रास्ता ही चुनते हैं.जीवन के इस पहलु को तुमने बखूभी समझा और व्यक्त किया है जिसकी जितनी भी तारीफ की जाए कम ही होगी..शाबाश अदिति !!!और निम्न पंक्तियाँ तो मुझे सबसे ज्यादा पसंद आई एवम प्रभावशाली लगी

"रोशनी ही रोशनी तांकता था हर जगह,
देख वो दुनियावी खोखले दिखावे को,
अँधेरे कोने मे जा कहीं सिमट गया।
चल पड़ा था अपना मान कर जिन्हें,
परछाईयों का धुंध पा आत्म उसका सिसक गया॥
स्वर्ण स्वप्न से जगा कोई…"

D Black Factor said...

Bahut hi achcha likha hai Aditi..real mai aisa hota hai..mai college pass karne ke baad dekh raha hu...this one is really touching..great work beta!

Aditi Chaudhary said...

अंकिता दी: आपकी इतनी बड़ी एवं प्ररेणास्पद टिप्पणी के लिए बहुत बहुत धन्यवाद्॥

Aditi Chaudhary said...

विनीत सर: आपका बहुत बहुत धन्यवाद सर्… सही कहा आपने ऐसा होता जरूर है, हम इसे कितनी जल्दी मान लें ये एक अलग बात है॥